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राष्ट्रभाषा को सुदृढ़ करो, हिन्दी को वरो – कवि दिनेश सिंह सेंगर की कलम से

राष्ट्रभाषा को चलो सुदृढ़ करो

मिलकर नमन सब आज हिन्दी को करो।

आओ मिलकर आज सब यह प्रण करो

राष्ट्रभाषा अब तो हिन्दी को वरो ।।

राष्ट्रभाषा हिन्दी क्यों रोने लगी,

अपने घर आंगन में वो खोने लगी।

अब तो इसके मान को ना कम करो,

छोड़कर भाषा सभी हिन्दी को वरो।।

देशभर में हिन्दी का अब मान हो,

राष्ट्रभाषा का यहां सम्मान हो।

पूर्णव्रत हिन्दी का यारो तुम करो,

छोड़ भाषा गैर हिन्दी को वरो।।

राष्ट्र की उन्नति तभी हो पाएगी,

राष्ट्रभाषा हिन्दी जब बन जाएगी ।

अब तो सारे काम हिन्दी में करो,

राष्ट्रभाषा अब तो हिन्दी को वरो।।

एक हिन्दी एक हिंदुस्तान का,

संकल्प लो अब राष्ट्र के निर्माण का ।

जय घोष अब चहुंओर हिन्दी का करो,

सारी भाषा छोड़ हिन्दी को वरो।।

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